ऐ मेरे राजदार ऐ मेरे राजदारऐ मेरे राजदार तू आज मुझको रो लेने देरो रहा हूं मैं...
पद्य साहित्य
सतत चलें हम सतत चलें हमनदी सिखाती सतत चलें हम,निर्झर-सा हो निर्मल जीवन।सुमन सुगंध सदा बिखराते,करें सुवासित...
हास्य-व्यंग्य से भरपूर ‘कॉकरोच जनता पार्टी चालीसा’ समाज और राजनीति की विडंबनाओं का अनोखा चित्रण प्रस्तुत करती...
कृष्ण-द्रौपदी संवाद (चीरहरण प्रसंग) पर आधारित यह भावपूर्ण काव्य खण्ड श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और धर्म की विजय...
तुम्हारा साथ तुम्हारा साथमैं लिखना तो बहुत कुछ चाहता हूँ,शब्दों का सागर कम ही लग रहा है...
कोई अनमोल-सी सौगात होती है दोस्ती कोई अनमोल-सी सौगात होती है दोस्ती।१महोब्बत की कड़ियाँ, कभी मत टूटने...
हो गये साठ के पार अभी असली इम्तिहान बाक़ी है हो गये साठ के पार अभी असली...
