जय काल भैरव
आल्हा छंद : जय काल भैरव
सुनो सुनाता तुम्हें कहानी,को काशी के पहरेदार।
भैरव बाबा को जग जाने,काल रूप शंकर अवतार।।
कैसे प्रकटे भैरव बाबा , पढ़ी सुनी है कथा अनेक।
श्री हरि पूछा था ब्रह्मा से,श्रेष्ट कौन तीनों में एक।।
ब्रह्मा बोले मुझको समझो, सृजन किया मैंने संसार।
अहंकार के भाव समझकर, किया तुरंत विष्णु इंकार।।
पहले निर्णय हो वेदों से, ऋषि मुनियों से पूछी बात।
सबने कहा श्रेष्ट शिव शंकर, ब्रह्मा मन कब माने मात।।
हुआ आगमन शंकर जी का, ब्रह्मा करते हैं उपहास।
क्रोध अग्नि शंकर मन उपजी, प्रकटे भैरव करने नाश।।
शंकर जी बहु विधि समझाया, ब्रह्मा सुना नहीं उपदेश।
रूप भयंकर कालदेव ने, पकड़ लिए ब्रह्मा के केश।।

पंचम सिर ब्रह्मा का काटा,अहं भाव का किया विनाश।
हत्या दोष निवारण करने, काशी आ कीन्हा हैं वास।।
शंकर जी राजा काशी के,काल भैरव है कोतवाल।।
उग्र रूप शंकर का भैरव, अवतारी दुष्टों के काल।।
काले कुत्ते की असवारी, रूप भयंकर देह विशाल।
कर त्रिशूल जो लगे डरावन, गले पड़ी मुण्डन की माल।।
वेद पुराणन महिमा गाई, शिवजी का पंचम अवतार।
अगहन कृष्ण अष्टमी भैरव, पूजन भजन करें नर नार।।
राजेश कौरव सुमित्र
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